कश्यप गोत्र
भारद्वाज गोत्र
वशिष्ठ गोत्र
अत्रि गोत्र
गोत्र के बिना पूजा क्यों अधूरी रह जाती है?
संकल्प के समय गोत्र बोलना जरूरी होता है
→ “अद्य ब्रह्मणः … कश्यप गोत्रः …”
बिना गोत्र के संकल्प पूरा नहीं माना जाता।
श्राद्ध-तर्पण में पितरों तक दान-पुण्य पहुँचाने के लिए गोत्र जरूरी है
→ गलत गोत्र बोलने से पुण्य गलत आत्मा तक पहुँच सकता है।
सगोत्र विवाह वर्जित है
→ विज्ञान भी कहता है कि एक ही गोत्र में 6-7 पीढ़ियों तक रक्त-संबंध रहता है। इसलिए सगोत्र विवाह से आनुवंशिक बीमारियाँ बढ़ने की संभावना रहती है।
आज गोत्र पता क्यों नहीं रहता?
गाँव से शहर आए
पुरानी वंशावली खो गई
दादा-परदादा के बाद किसी ने रिकॉर्ड नहीं रखा
इंटर-कास्ट मैरिज के बाद गोत्र कन्फ्यूजन हो गया
नतीजा – पूजा के समय शर्मिंदगी और मन में असमंजस।
घर बैठे सही गोत्र कैसे पता करें? (2025 में सबसे आसान तरीका)
अब इसके लिए पंडित जी के पास बार-बार जाने या मंदिरों में चक्कर लगाने की जरूरत नहीं।
कुलवृक्ष (गुजरात) की रिसर्च टीम ने पिछले 8 साल में 25,000+ परिवारों का सही गोत्र, कुलदेवी-कुलदेवता, शाखा-प्रवर, वेद पता किया है।
आपको सिर्फ ये जानकारी देनी है:
आपके और आपके पिता-दादा का पूरा नाम
मूल गाँव/तालुका (अगर पता हो)
सरनेम और कोई भी पुरानी जानकारी (जितनी याद हो)
बस!
7 से 30 दिन में आपको मिलेगा:
सही गोत्र + प्रमाण
कुलदेवी-कुलदेवता का नाम और मंदिर का पता
शाखा, प्रवर, वेद, सूत्र
डिजिटल वंशावली सर्टिफिकेट (PDF)
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लोग क्या कहते हैं?
“40 साल बाद पता चला कि हमारा असली गोत्र ‘वशिष्ठ’ है, पहले ‘कश्यप’ बोलते थे। पहली बार श्राद्ध में मन को शांति मिली।”
– राकेशभाई पटेल, अहमदाबाद
“बेटी की शादी थी, लड़के वालों ने गोत्र पूछा। कुलवृक्ष ने 15 दिन में सब क्लियर कर दिया।”
– जयश्रीबेन शाह, सूरत
अंत में…
अपने बच्चों को वो विरासत दो जो हजारों साल पुरानी है।
एक बार सही गोत्र पता चल जाए, तो हर पूजा में गर्व से बोल सकेंगे –
“अहं … भारद्वाज गोत्रः … शर्मा/पटेल/शाह …”
जय माताजी 🙏
कुलवृक्ष टीम, गुजरात
दिनांक: 29 नवंबर 2025
